Ham Vahi Saaz Hain

हम वाही साज़ हैं
जो तेरी उँगलियाँ छू लेने को बेताब है
हम वही आग हैं
जो तुझमे जल जाने को बेताब है
और तुम वही नमी हो
जिसकी जरुरत आँखों को नहीं मेरे लबों को है
तुम वही कमी हो
जिसकी जरुरत जमाने को नहीं मेरी जिंदगी को है।

Muddat Baad Lauta Hoon…

मुद्दत बाद लोटा हूँ शायद तुझमे कहीं मेरी यादें बाकी होंगी
तेरी आँखों में मेरी तस्वीरें
तेरे हाथों में मेरी तकदीरें
तेरी बफाओं को समेटती मेरी मोहब्बत की जंजीरें… बाकी होंगी
    मुद्दत बाद लोटा हूँ शायद तुझमें कहीं मेरी यादें बाकी होंगी

Maut Do To Izzat Se…

शेहंशाह है तू और ये दिल आबाम है
जिंदा रखो तो सिर्फ दिल में,
या मौत दो जो हर आशिक का अंजाम है
और अगर मौत दो तो इज्ज़त से,
क्योंकि दुनिया में अपना भी कुछ नाम है…।

© Gurmail Rathi